गहलोत सरकार का फैसला, छह माह पहले हुए शिक्षकों के तबादले होंगे रद्द

प्रदेश के शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. वजह है पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार में सत्ता के नजदीक रहे शिक्षकों को प्रदेश की नई गहलोत सरकार द्वारा दिया गया झटका. राज्य सरकार ने 3600 से ज्यादा शिक्षकों पर तलवार लटका दी है. इनमें से करीब 500 शिक्षकों के तबादले रद्द करने की और शेष अध्यापकों को उनके मूल विभाग में भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

शिक्षा विभाग में मची खलबली
दरअसल पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल के आखरी महीनों में हुए शिक्षकों के तबादलों को शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने रद्द करने का फैसला किया है. उसके बाद से शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है. शिक्षक अपनी जगह बचाने की हर मुमकिन कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन मंत्री डोटासरा झुकने को तैयार नहीं हैं. मंत्री के आदेश के बाद 500 शिक्षकों के जहां तबादले निरस्त हो जाएंगे, वहीं 3100 शिक्षकों को उनके मूल पद पर भेजा जाएगा.

पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद ऑफलाइन स्कूलों में जमे रहे
इस पूरी कवायद के पीछे मंत्री डोटासरा का कहना है कि इन शिक्षकों ने गलत तरीके से जगह हथियाई है. ऑनलाइन कार्यभार भी ग्रहण भी नहीं किया. पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद ऑफलाइन स्कूलों में जमे रहे. यही नहीं वे विभाग के आदेशों को भी दरकिनार करते रहे हैं, जिसके चलते सरकार को इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है.

भेदभाव को नए आदेश से दुरुस्त किया जाएगा
डोटासरा ने पर्वूवर्ती बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुरानी सरकार ने चहेते शिक्षकों की 6-डी की प्रक्रिया भी नहीं की. उन्हें गलत तरीके से छूट का लाभ दिया गया. ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा में भेजा गया. राज्य सरकार पुरानी सरकार द्वारा किए गए भेदभाव को नए आदेश से दुरुस्त करेगी. सरकार के इस फैसले से शिक्षक संगठन में गहरा रोष व्याप्त है.

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